ऐक्रेलिक फाइबर एल्युमीनियम FRP/Foil_2009 एल्युमीनियम FRP/Foil_2011 एल्युीमिनियम इन्गामट्स अनरॉट एल्यूमिनियम (अलोय और गैर-अलोय एल्यूमिनियम) इलास्टोमेरिक यार्न फ्लेक्सिबल स्लैबस्टाक पालिओल कास्टिक सोडा कोटेड पेपर कार्बन ब्लैक डिमेथोएट टेक्निकल
डीऑक्टील फ्तहलते(डी ओ प ) इलेक्ट्रिकल इंसुलेटर्स फ्रंट एक्सल बीम फैटी अल्कोहल्स H & R SS प्रोडक्ट्स हॉट रोल्ड कॉइल etc हॉट रोल्ड क्वायल में गैर-अलॉय और अलॉय इस्पात हॉट रोल्ड शीट्स और प्लटेस में गैर-अलॉय और अलॉय इस्पाअत लीनियर अल्काइल बेंजीन मिथाइल अस्टोअस्ताते नायलॉन टायर सी डी. फैब्रिक ऑक्सो अलकहोल्स
पार्टिकल बोर्ड पैसेंजर कार टायर फ्थलिक अनिद्रिड़े रबर केमिकल रबर केमिकल(पुनर्विचार) सीमलेस पाइप और ट्यूब सीआर एसएस उत्पाद सोडा एश सोडियम साइट्रेट सोडियम-डाय-क्रोमेट सोडियम नाइट्रेट अनकोटड पेपर अनव्रूघत एल्युमीनियम अनरॉट एल्यूमिनियम (2016)
समरी ऑफ़ केसेस
महानिदेशक के अंतिम निष्कर्ष
सोडियम साइट्रेट हॉट रोल्ड क्वायल हॉट रोल्ड फ्लैट शीट्स एवं प्लेट्स
प्राय: पूछे गए प्रश्न

 

व्‍यापार उदारीकरण के परिणामस्‍वरूप आयातों में अचानक वृद्धि होने से घरेलू उद्योग पर दबाव बढ़ सकता है। रक्षोपाय घरेलू उत्‍पादकों की उस समय रक्षा करने का डब्‍ल्‍यूटीओ विधान में बना एक ऐसा सुरक्षा वाल्‍व है जब वे विदेशी उत्‍पादकों के साथ प्रतिस्‍पर्धा करने का प्रयास कर रहे होते हैं।

रक्षोपाय क्‍या है?
हमें रक्षोपाय क्‍यों चाहिए?
रक्षोपाय का इतिहास
रक्षोपाय करार का उद्देश्‍य
रक्षोपाय कब लगाया जा सकता है?
रक्षोपाय और गैर-भेदभाव
रक्षोपाय जांच के लिए कौन सी प्रक्रिया अपनाई जाए?
करार के नियम
गोपनीय सूचना का संव्‍यवहार
रक्षोपाय कितने समय के लिए लगाया जा सकता है?
रक्षोपाय उपायों की समीक्षा
रक्षोपाय उपायों की सीमा
प्रभावित डब्‍ल्‍यूटीओ सदस्‍यों के लिए क्षतिपूर्ति
रक्षोपाय साधनों का नवीकरण
अनन्‍तिम रक्षोपाय
विकासशील देश और रक्षोपाय
रक्षोपाय समिति
अधिसूचना अपेक्षा

यदि रक्षोपाय की विधि सम्‍मतता पर विवाद हो तो क्‍या होता है?

क्‍या भारत किसी भी प्रकार का रक्षोपाय लगाता है?
आवेदन कौन दायर कर सकता है?
आवेदनपत्र में कौन-कौन सी सूचनाओं को शामिल किया जाना चाहिए?
आवेदनपत्र कब दायर किया जा सकता है?
''समान वस्‍तु'' और इच्छुक पक्षकार'' का क्‍या अर्थ है?
देश में आयात से संबंधित सूचना किस तरह एकत्र करें?
यदि कोई सूचना उपलब्‍ध न कराई गई हो अथवा संबंधित पक्षकार सहयोग न करें तो क्‍या होता है?
किसी को पाटनरोधी शुल्‍क, प्रतिकारी शुल्‍क अथवा रक्षोपाय शुल्‍क के लिए कब आवेदन करना चाहिए?
क्‍या कोई पाटनरोधी शुल्‍क और रक्षोपाय शुल्‍क दोनों के लिए एक साथ आवेदन कर सकता है?
मामले जिनकी महानिदेशक द्वारा जांच की गई
महानिदेशक की सिफारिशों पर विचार

 

रक्षोपाय शुल्‍क क्‍या है? वापस शीर्ष पर जाएं

रक्षोपाय एक प्रकार की अस्‍थायी राहत है। उनका प्रयोग तब किया जाता है जब प्रशुल्‍क रियायतों अथवा आयातक देश मानी गई डब्‍ल्‍यूटीओ की अन्‍य बाध्यताओं के परिणामस्‍वरूप किसी विशिष्‍ट उत्‍पाद का आयात अप्रत्‍याशित रूप से एक ऐसे बिंदु तक पहुंच जाता है जिससे ''समान अथवा सीधे प्रतिस्‍पर्धी उत्‍पादों'' के घरेलू उत्‍पादकों को गंभीर क्षति होने लगती है अथवा घरेलू उत्‍पादकों के समक्ष गंभीर क्षति की संभावना उत्‍पन्‍न हो जाती है। रक्षोपाय घरेलू उत्‍पादकों को आयातों की तुलना में अधिक प्रतिस्‍पर्धी बनने के लिए अनुग्रह अवधि प्रदान करता है।

जब ऐसा होता है तो आयातक देश की सरकार रियायतें अथवा बाध्यताएं समाप्‍त कर सकती है, परंतु उससे कुछ अन्‍य रियायतों की पेशकश करके कुछ क्षतिपूर्ति प्रदान करने की अपेक्षा की जाती है। अन्‍यथा, पीड़ित डब्‍ल्‍यूटीओ सदस्‍य समतुल्य रियायतें वापस लेकर उसका प्रतिकार कर सकता है/सकते हैं। उद्योग अथवा कंपनियां अक्‍सर अपनी सरकारों से रक्षोपाय संबंधी कार्रवाई करने का अनुरोध करती हैं।

रक्षोपाय सामान्‍यत: निर्धारित दर अथवा मानक दर से उच्‍चतर दर पर वर्धित शुल्‍क अथवा आयातों पर मात्रात्मक प्रतिबंध के रूप में लगाया जाता है।

हमें रक्षोपाय क्‍यों चाहिए? वापस शीर्ष पर जाएं

ऐसे माना जा सकता है कि रक्षोपाय व्‍यापार उदारीकरण कार का ब्रेक है। रक्षोपाय बचाव का एक अस्‍थायी रास्‍ता दिखाकर डब्‍ल्‍यूटीओ के सदस्‍यों को एक दूसरे को व्‍यापार वार्ताओं में उदारीकरण के कुछ अन्‍य उपायों की पेशकश करने का विश्वास देता है जो वे शायद अन्‍यथा नहीं करते।

रक्षोपाय का इतिहास वापस शीर्ष पर जाएं

इस व्‍यापार उपचार की जड़ें जीएटीटी, 1994 (और इसके डब्‍ल्‍यूटीओ पूर्व संस्करण) के अनुच्‍छेद XIX में मौजूद हैं। यह प्रावधान डब्‍ल्‍यूटीओ के सदस्‍य को किसी उत्‍पाद के आयातों पर उस स्थिति में अस्‍थायी प्रतिबंध लगाने (जिसे ''रक्षोपाय'' कार्रवाई के रूप में जाना जाता है) की अनुमति प्रदान करता है जब इन आयातों की अधिकता से उसका घरेलू उद्योग प्रभावित हो।

उरुग्‍वे दौर से पहले रक्षोपाय का प्रयोग कभी-कभार ही किया जाता था। कुछ सरकारें निर्यातक राष्‍ट्रों को अपने निर्यातों पर ''स्‍वेच्‍छा'' से प्रतिबंध लगाने के लिए राजी करके अथवा बाजार की भागीदारी अन्‍य साधनों से करने पर सहमत होकर अपने घरेलू उद्योग की रक्षा करने को अधिमानता देती हैं। जीएटीटी की प्रवंचना करते हुए ऐसे कुछ 'नियम विरुद्ध उपायों'' पर मोटर वाहन, इस्पात और सेमी-कंडक्‍टरों सहित उत्‍पाद की एक व्‍यापक श्रृंखला के लिए द्विपक्षीय वार्ताएं की गईं। ये उपाय जीएटीटी के जरिए बहुपक्षीय विषयों के अध्‍यधीन नहीं थे और उनकी वैधानिकता पर संदेह था। कुछ रक्षोपाय कार्य, जिन्‍हें वास्तव में अनुच्‍छेद XIX के अंतर्गत किया गया, उन्‍हें एक स्‍थायी स्‍तर का संरक्षण प्रदान करने के लिए अनिश्कित काल के लिए छोड़ दिया गया।

रक्षोपाय करार का प्रयोजन वापस शीर्ष पर जाएं

रक्षोपाय करार राष्‍ट्रीय प्राधिकारियों द्वारा रक्षोपाय जांच की जरूरतों और रक्षोपाय उपायों का अनुप्रयोग करने के लिए नियम निर्धारित किए। इस करार में नियम निर्धारित करके पारदर्शिता अपनाने और स्‍वेच्‍छाचारिता से बचने पर जोर दिया गया। इस करार का लक्ष्‍य, वर्धित आयातों से प्रतिकूल रूप से प्रभावित होने वाले उद्योगों की ओर से संरचनात्‍मक समायोजन को प्रोत्‍साहित करना और उसके द्वारा अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में प्रतिस्‍पर्धा बढ़ाना है।

इस करार का उद्देश्‍य ''नियम विरुद्ध उपायों'', स्‍थायी रक्षोपाय कार्यों, स्‍वैच्‍छिक निर्यात नियंत्रण और क्रमबद्ध विपणन, द्वारा कारित समस्‍याओं का हल निकालना है। इस करार में व्‍यापार पर बहुपक्षीय नियंत्रण लगाने के प्रयोजनार्थ भविष्‍य में ''नियम विरुद्ध उपायों'' के प्रयोग को निषेध किया गया है। रक्षोपाय करार में यह अपेक्षा की जाती है कि विद्यमान सभी ''नियम विरुद्ध उपायों'' को चरणबद्ध रूप से समाप्‍त कर दिया जाएगा और दिसम्‍बर, 1998 की समाप्‍ति तक उन्‍हें रक्षोपाय करार के अनुरूप बना लिया जाएगा।

रक्षोपाय का प्रयोग कब किया जा सकता है? वापस शीर्ष पर जाएं

रक्षोपाय उपाय का प्रयोग तब किया जा सकता है जब :

  • किसी वस्‍तु के वर्धित आयात हो रहे हों – संवर्धित आयातों की मात्रा या निरपेक्ष रूप से हो रही हो अथवा यह वृद्धि घरेलू उत्‍पादन के तुलनात्मक रूप में हुई हो।
  • गंभीर क्षति हुई हो अथवा गंभीर क्षति की संभावना उत्‍पन्‍न हो गई हो-

''गंभीर क्षति'' को घरेलू उद्योग की स्‍थिति में भारी समग्र हानि के रूप में परिभाषित किया गया है। यह निर्धारित करने के लिए कि क्‍या गंभीर क्षति मौजूद है, जांचकर्ता प्राधिकारियों को उन सभी प्रासंगिक कारकों का मूल्‍यांकन करना चाहिए जिनका उद्योग की स्‍थिति पर प्रभाव पड़ता है, इनमें आयातों में वृद्धि की निरपेक्ष एवं तुलनात्मक दर तथा मात्रा, बाजार हिस्‍सा जिन पर वर्धित आयातों ने कब्‍जा कर लिया है, के साथ-साथ घरेलू उद्योग की बिक्री, उत्‍पादन, उत्‍पादकता, क्षमता, उपयोग, लाभ और हानि तथा रोजगार के स्‍तर में परिवर्तन शामिल है।

''गंभीर क्षति की संभावना” से आशय गंभीर क्षति के स्‍पष्‍ट एवं आसन्‍न खतरे से है।

संबंधित उत्‍पाद के वर्धित आयातों और गंभीर क्षति के बीच कॉजल लिंक की मौजूदगी के प्रयोजनमूलक साक्ष्‍य मौजूद होने चाहिए। साथ ही उस समय घरेलू उद्योग को आयातों के अलावा अन्‍य कारकों द्वारा कारित की गई क्षति के लिए घरेलू उद्योग को वर्धित आयातों द्वारा कारित की गई क्षति को उत्तरदायी नहीं ठहराया जाना चाहिए।

''घरेलू उद्योग'' का आशय उन उत्‍पादकों से है -

  1. भारत में समान वस्‍तु अथवा सीधी प्रतिस्‍पर्धी वस्‍तु के समग्र रूप से उत्‍पादकों से; अथवा
  2. जिनका भारत में समान वस्‍तु अथवा सीधी प्रतिस्‍पर्धी वस्‍तु का सामूहिक उत्‍पादन भारत में उस वस्‍तु के कुल उत्‍पादन का एक बड़ा हिस्‍सा बनता हो।

रक्षोपाय एवं गैर-भेदभाव वापस शीर्ष पर जाएं

किसी तरह का भेदभाव न करने का डब्‍ल्‍यूटीओ का सिद्धांत रक्षोपाय करार में निहित है। इसमें प्रावधान किया गया है कि अधिकांश मामलों में रक्षोपाय साधन का अनुप्रयोग गैर-चयनात्मक (सर्वाधिक तरजीही राष्‍ट्र अथवा ''एमएफएन'') आधार पर किया जाना चाहिए, उसके प्रभावी रहने पर उसे क्रमिक रूप से उदार बनाया जाए और शुल्‍क का अधिरोपण किए जाने वालो सदस्‍य द्वारा ऐसे अन्‍य सदस्‍यों की क्षतिपूर्ति की जानी चाहिए जिनका व्‍यापार प्रभावित हुआ है।

रक्षोपाय जांच के लिए कौन सी प्रकिया अपनाई जाए? वापस शीर्ष पर जाएं

नए रक्षोपाय उपायों का अनुप्रयोग पारदर्शिता सुनिश्‍चित करने के लिए स्‍थापित प्रक्रिया के अनुसार जांच का आयोजन करके ही किया जा सकता है। रक्षोपाय करार जांच प्रक्रिया के कुछ नियम निर्धारित करता है परंतु उनके विस्‍तृत विवरण का निर्धारण सदस्‍यों के अपने भू-भाग के अंदर करने को छोड़ देता है।

करार के नियम वापस शीर्ष पर जाएं

जांच का आयोजन करने से पहले जांच की प्रक्रिया निर्धारित की जानी चाहिए और उसे प्रकाशित किया जाना चाहिए। किसी जांच के लिए एक युक्‍तियुक्‍त सार्वजनिक नोटिस दिया जाना चाहिए। जांचकर्ता प्राधिकारियों को मामले का एक विस्‍तृत विवरण एक रिपोर्ट के रूप में प्रकाशित करना होगा जिसमें जांच किए गए तथ्‍यों की संगतता का प्रदर्शन करने सहित सभी प्रासंगिक मुद्दों के संबंध में उनके जांच परिणाम को स्‍पष्‍ट करना होगा। जांचकर्ता प्राधिकारियों को सार्वजनिक सुनवाई का आयोजन करना होगा अथवा इच्छुक पक्षकारों (चाहे वह आयातक, निर्यातक और उत्‍पादक हो) को अपने विचारों की अभिव्‍यक्‍ति करने का और जिस मामले की जांच की जा रही है उसके संबंध में अन्‍यों के विचारों का प्रत्‍युत्तर देने के लिए कोई अन्‍य उपयुक्‍त साधन प्रदान कराना होगा। पक्षकारों के विचार इस विषय पर लिए जाने चाहिए कि क्‍या रक्षोपाय उपाय जनहित में होगा अथवा नहीं।

गोपनीय सूचना का संव्यहार वापस शीर्ष पर जाएं

जिस सूचना के लिए गोपनीय उपचार का अनुरोध किया गया है, उसके साथ एक सार्वजनिक सारांश अथवा इस आशय का एक व्‍याख्‍यात्‍मक नोट प्रस्‍तुत किया जाना चाहिए कि उसका सार रूप में प्रस्‍तुतिकरण किया जाना संभव क्‍यों नहीं है। यदि पाया जाता है कि गोपनीयता अभीष्ट नहीं है और उस सूचना का प्रस्‍तुतिकरण करने वाला पक्षकार उसे संक्षिप्‍त रूप में प्रस्‍तुत करने का इच्‍छुक नहीं है अथवा उसका प्रकटन प्राधिकृत नहीं करना चाहता है तो प्राधिकारी उस सूचना की तब तक अवहेलना करेंगे जब तक अन्‍य स्रोतों से यह अभिव्‍यक्‍त न हो जाए कि उक्‍त सूचना सही है।

रक्षोपाय कितने समय तक के लिए लगाया जा सकता है? वापस शीर्ष पर जाएं

किसी भी रक्षोपाय शुल्‍क को चार वर्षों से अधिक समय के लिए तब तक नहीं लगाया जा सकता है जब तक नई जांच करके यह पाया न जाए कि गंभीर क्षति का निवारण करने अथवा उसका उपचार करने के लिए इसकी निरंतरता आवश्‍यक है और इस बात के साक्ष्‍य हैं कि घरेलू उद्योग समायोजन कर रहा है। शुरूआत में लगाए गए रक्षोपाय और उसका विस्‍तारण आठ वर्षों से (अथवा विकासशील देशों के लिए दस वर्षों से) अधिक नहीं होना चाहिए। इसके अतिरिक्‍त, एक वर्ष से अधिक के समय के लिए लगने वाले रक्षोपाय उपायों को उनके अनुप्रयोग की अवधि के दौरान क्रमिक रूप से नियमित अंतराल पर उदारीकृत किया जाएगा। यह अपेक्षा प्रत्‍येक विस्तारित अवधि पर भी लागू होगी।

रक्षोपाय उपायों की समीक्षा वापस शीर्ष पर जाएं

तीन वर्षों से अधिक की अवधि के लिए प्रत्‍येक उपाय की मध्‍यावधि समीक्षा की जानी चाहिए और इस समीक्षा के आधार पर, यदि उपयुक्‍त पाया गया तो, इस उपाय का अनुप्रयोग करने वाला डब्‍ल्‍यूटीओ सदस्‍य को या तो इसे वापस ले लेना चाहिए अथवा इसके उदारीकरण में तीव्रता लानी चाहिए।

रक्षोपाय उपाय की सीमा वापस शीर्ष पर जाएं

सदस्‍यों से यह अनुरोध किया जाता है कि वे रक्षोपाय उपाय का अनुप्रयोग गंभीर क्षति का उपचार करने अथवा उसका निवारण करने और समायोजन को सुलभ बनाने के लिए आवश्‍यक सीमा तक करेगा। प्रशुल्‍क उपायों के संबंध में इस करार में प्रशुल्‍क में निर्दिष्‍ट दर के ऊपर कोई अधिकतम वृद्धि निर्धारित नहीं की गई है।

प्रभावित डब्‍ल्‍यूटीओ सदस्‍यों के लिए क्षतिपूर्ति वापस शीर्ष पर जाएं

रक्षोपाय उपाय का अनुप्रयोग करने वाले डब्‍ल्‍यूटीओ सदस्‍यों को सामान्‍यत: अन्‍य सदस्‍यों को उनके नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति करनी चाहिए। उन्‍हें रक्षोपाय की अवधि के दौरान प्रभावित सदस्‍यों को पर्याप्‍तत: समान स्‍तर की रियायतों और अन्‍य अनुग्रहों की पेशकश करनी चाहिए। यदि व्‍यापार क्षतिपूर्ति के संबंध में 30 दिनों के अंदर कोई करार नहीं किया जाता है तो प्रभावित निर्यातक सदस्‍य अलग-अलग रूप से पर्याप्‍तत: समतुल्य रियायतों तथा अन्‍य अनुग्रहों को निलंबित कर सकते हैं अर्थात प्रशुल्‍क बढ़ा सकते हैं – जब तक कि वस्‍तु व्‍यापार परिषद (काउंसिल फॉर ट्रेड इन गुड्स) इसे अस्‍वीकार न कर दें। रक्षोपाय उपाय लगाने के प्रथम तीन वर्षों के दौरान, तथापि, यदि यह उपाय आयातों में निरपेक्ष वृद्धि के प्रत्‍युत्तर में नहीं लगाया जाता है अथवा अन्‍यथा रक्षोपाय करार के प्रावधानों की संपुष्‍टि नहीं करता है तो यह उपाय उपलब्‍ध नहीं होगा।

रक्षोपाय साधनों का पुन: अनुप्रयोग वापस शीर्ष पर जाएं

उरुग्‍वे दौर से पहले दुरुपयोग को लक्ष्य करते हुए रक्षोपाय करार में एक अन्‍य नियम यह है कि किसी एक उत्‍पाद पर रक्षोपाय शुल्‍क का पुन: उपयोग दो वर्षों से अधिक की अवधि और मूल रक्षोपाय उपाय की व्‍यतीत कालावधि के बराबर अवधि के लिए नहीं किया जा सकता है। विकासशील देश सदस्‍यों के लिए यह अवधि 2 वर्षों से अधिक अथवा मूल रक्षोपाय जांच की कालावधि की आधी अवधि के लिए प्रतिस्थापित की गई है। अन्‍य सदस्‍य भी 180 दिनों अथवा उससे कम की अवधि के लिए रक्षोपाय उपाय का पुन: अनुप्रयोग कर सकते हैं बशर्ते कि मूल रक्षोपाय उपाय प्रारंभ करने की तारीख से कम से कम एक वर्ष की अवधि व्‍यतीत हो गई हो और इस पुन: अनुप्रयोग की तारीख से ठीक पहले पांच वर्षों के दौरान दो बार से अधिक रक्षोपाय उपाय का प्रयोग न किया गया हो।

अनन्‍तिम रक्षोपाय वापस शीर्ष पर जाएं

ऐसी परिस्‍थितियों में जहां विलंब करने से कोई ऐसी क्षति कारित हो सकती है जो अपूरणीय हो, वहां इस प्रारंभिक अवधारणा के आधार पर अनन्‍तिम रक्षोपाय उपाय का अनुप्रयोग किया जा सकता है कि इस बात के स्‍पष्‍ट साक्ष्‍य है कि वर्धित आयातों ने गंभीर क्षति कारित की है अथवा गंभीर क्षति की संभावना उत्‍पन्‍न कर दी है। यह उपाय प्रतिदेय प्रशुल्‍क वृद्धि के रूप में होने चाहिए और उसको अधिकतम 200 दिनों के लिए बनाए रखा जाना चाहिए। किसी अनन्‍तिम साधन के अनुप्रयोग की अवधि को रक्षोपाय साधान की कुल अवधि में शामिल किया जाना चाहिए। अनन्‍तिम साधन का अनुप्रयोग करने के तुरंत बाद परामर्श प्रारंभ कर देना चाहिए।

विकासशील देश और रक्षोपाय वापस शीर्ष पर जाएं

किसी विकासशील सदस्‍य देश से उद्भवित होने वाले उत्‍पाद पर रक्षोपाय उपाय का प्रयोग तब तक नहीं किया जाएगा, जब तक कि आयातक सदस्‍य देश में संबंधित उत्‍पाद का आयातों में हिस्‍सा 3 प्रतिशत से अधिक न हो जाए, परंतु शर्त यह है कि 3 प्रतिशत आयात हिस्‍से से कम के आयात वाले विकासशील सदस्‍य देशों का उस संबंधित वस्‍तु का कुल आयात सामूहिक रूप से 9 प्रतिशत से अधिक न हो।

रक्षोपाय संबंधी समिति वापस शीर्ष पर जाएं

रक्षोपाय संबंधी समिति का गठन रक्षोपाय संबंधी करार के कार्यान्‍वयन और प्रचालन को मानीटर करना, उन पर रिपोर्ट तैयार करने तथा उसके संबंध में वस्‍तु व्‍यापार परिषद (काउंसिल फॉर ट्रेड इन गुड्स) को सिफारिशें करने; डब्‍ल्‍यूटीओ सदस्‍यों की अधिसूचनाओं की समीक्षा करने, अनुप्रयोग करने के लिए रक्षोपाय करार के कार्यविधि संबंधी प्रावधानों के संबंध में किसी डब्‍ल्‍यूटीओ सदस्‍य द्वारा अनुरोध किए जाने पर अन्‍य सदस्‍य अनुपालनकर्ता के रूप में अपने जांच-परिणाम निकालने परामर्श देकर सहयोग करने; पूर्ववर्ती उपायों को चरणबद्ध रूप से समाप्‍त करने को मानिटर करने; और क्षतिपूर्ति के अभाव में रियायातों के प्रस्‍तावित निरस्‍तीकरण की समीक्षा करने के लिए किया गया है।

अधिसूचना की अपेक्षाएं वापस शीर्ष पर जाएं

सदस्‍यगण रक्षोपाय समिति के माध्यम से एक दूसरे को अपनी निजी विधियों, विनियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया को तथा उनसे संबंधित किसी परिवर्तन को, गंभीर क्षति अथवा उसकी मौजूदगी की स्‍थिति में और उसके कारणों को जांच की शुरूआत के लिए; वर्धित आयातों द्वारा कारित गंभीर क्षति अथवा उसकी संभावना के निष्कर्षों को, रक्षोपाय उपाय अथवा अनन्‍तिम साधन का अनुप्रयोग अथवा उसकी सीमा के निर्णय को अधिसूचित करेंगे जिसमें ऐसी प्रासंगिक सूचनाएं होनी चाहिए जिन पर वह निर्णय आधारित है, हालांकि सदस्‍यों को अपनी अधिसूचनाओं में गोपनीय सूचना का प्रकटन करने की आवश्‍यकता नहीं होती है।

इसके अतिरिक्‍त, परामर्श के परिणाम, किए गए उपायों की मध्‍यावधि समीक्षा के परिणाम, किसी रूप की रियायत और/या रियायतों और नियम विरुद्ध साधनों के प्रस्‍तावित निलंबन जो डब्‍ल्‍यूटीओ करार के प्रभावी होने की तारीख को प्रभावी थे, तथा बाद में उनको चरणबद्ध रूप से समाप्‍त करने अथवा उन्‍हें अनुमत परिवर्ती अवधि के अंतर्गत करार की संपुष्‍टि में लाने के लिए समय-सारणी को अधिसूचित करेंगे।

सदस्‍यगण डब्‍ल्‍यूटीओ के अन्‍य सदस्‍यों को संगत विधियों और विनियमों, कार्यों तथा प्रभावी साधनों की सूचना भी देंगे।

यदि रक्षोपाय की विधिसम्‍मतता के संबंध में विवाद हो तो क्‍या होता है वापस शीर्ष पर जाएं

रक्षोपाय करार सदस्‍यों को सामान्‍य डब्‍ल्‍यूटीओ विवाद निपटान प्रक्रिया के अंतर्गत उत्‍पन्‍न विवाद और परामर्शों का अनुसरण करने का निदेश देता है।

क्‍या भारत किसी प्रकार का रक्षोपाय लगाता है वापस शीर्ष पर जाएं

करार के अनुसरण में आयातों द्वारा कारित की जा रही क्षति के विरुद्ध घरेलू उत्‍पादकों को राहत देने के लिए विभिन्‍न प्रावधानों को शामिल करते हुए सीमाशुल्‍क प्रशुल्‍क अधिनियम, 1975 में संशोधन किए गए। इन संशोधनों में सीमाशुल्‍क प्रशुल्‍क अधिनियम, 1975 की धारा 8ख, धारा 8ग, धारा 9क, धारा 9ख ओर धारा 9ग और उसके अंतर्गत बनी नियमावली में किए गए संशोधनों को शामिल हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्‍य चीन जनवादी गणराज्‍य से आयातों, वर्धित आयातों, वित्तीय सहायता प्राप्‍त अथवा पाटित आयातों के प्रतिकूल प्रभावों को दूर करना है। सीमाशुल्‍क प्रशुल्‍क (रक्षोपाय शुल्‍क की पहचान एवं आकलन) नियमावली, 1997 तथा सीमाशुल्‍क प्रशुल्‍क (परिवर्ती उत्‍पाद विशिष्‍ट रक्षोपाय शुल्‍क) नियमावली 2002 प्रक्रियात्मक पहलुओं को शासित करते हैं।

आवेदनपत्र कौन दायर कर सकता है? वापस शीर्ष पर जाएं

रक्षोपाय जांच की शुरूआत करने के लिए आवेदन किसी भी व्यथित उत्‍पादक/विनिर्माता, व्‍यापार प्रतिनिधिक निकाय, फर्म या एसोसिएशन द्वारा दायर किया जा सकता है जो घरेलू उद्योग का प्रतिनिधित्‍व करता हो।

आवेदनपत्र में कौन-कौन सी सूचनाओं को शामिल किया जाना चाहिए? वापस शीर्ष पर जाएं

आवेदनपत्र में, अन्‍य बातों के साथ-साथ, निम्‍नलिखित सूचना होनी चाहिए:-

  • क. आवेदक (आवेदकों) के संबंध में सामान्‍य सूचना
  • ख. वह उत्‍पाद जिसके बारे में आयातों में वृद्धि देखी गई
  • ग. वर्धित आयात
  • घ. घरेलू उत्‍पादन
  • ङ. क्षति
  • च. क्षति का कारण
  • छ. प्रस्‍तुतिकरण
  • रक्षोपाय शुल्‍क नियमावली के नियम 5(2) के अंतर्गत यथानिर्धारित प्रारूप

    आवेदन कब दायर किया जा सकता है? वापस शीर्ष पर जाएं

    रक्षोपाय शुल्‍क का अधिरोपण करने के लिए आवेदन तब दायर किया जा सकता है जब किसी विशिष्‍ट उत्‍पाद के वर्धित आयात के कारण समान अथवा सीधे प्रतिस्‍पर्धी वस्‍तु के घरेलू उत्‍पादकों को गंभीर क्षति होने लगे अथवा गंभीर क्षति की संभावना उत्‍पन्‍न होने लगे।

    ''समान वस्‍तु'' और इच्छुक पक्षकार'' का आशय क्‍या है ? वापस शीर्ष पर जाएं

  • क. ''समान वस्‍तु'' का आशय किसी ऐसी वस्‍तु से है जो जांचाधीन वस्‍तु से सभी रूपों में समान अथवा समरूप हो
  • ख. ''हितबद्ध पक्षकार'' में -
    1. रक्षोपाय शुल्‍क का अधिरोपण करने के प्रयोजनार्थ जांचाधीन वस्‍तु का कोई निर्यातक या विदेशी उत्‍पादक या आयातक या व्‍यापार अथवा व्यापार एसोसिएशन शामिल होगा जिसके अधिकांश सदस्‍य ऐसी वस्‍तु के उत्‍पादक, निर्यातक अथवा आयातक हों;
    2. निर्यातक देश की सरकार; और
    3. समान वस्‍तु अथवा सीधे प्रतिस्‍पर्धी वस्‍तु का भारत में कोई उत्‍पादक अथवा कोई व्‍यापार या बिजनेस एसोसिएशन जिसके अधिकांश सदस्‍य उक्‍त वस्‍तु अथवा सीधे प्रतिस्‍पर्धी वस्‍तु के भारत में उत्‍पादक हों अथवा उसका व्‍यापार करते हों।
  • देश में आयातों से संबंधित सूचना किस तरह एकत्र की जाए? वापस शीर्ष पर जाएं

    आयात की गई वस्‍तु की मात्रा और मूल्‍य से संबंधित आंकड़े कुछ प्रकाशित स्रोतों जैसे वाणिज्‍यिक आसूचना एवं सांख्‍यिकी महानिदेशालय (डीजीसीआईएस) प्रकाशन, सीमाशुल्‍क की दैनिक सूची जैसे प्रकाशित स्रोतों और/अथवा अन्‍यथा उपलब्‍ध सूचना से प्राप्‍त किए जा सकते हैं। सूचना प्रस्‍तुत करते समय सूचना के स्रोत का उल्‍लेख अवश्‍य किया जाए।

    यदि कोई सूचना उपलब्‍ध नहीं कराई गई हो अथवा संबंधित पक्षकार सहयोग न करें तो क्‍या होता है? वापस शीर्ष पर जाएं

    यदि कोई इच्छुक पक्षकार किसी आवश्‍यक सूचना तक पहुंच की मनाही कर देता है अथवा युक्‍तियुक्‍त अवधि के अंतर्गत जरूरी सूचना प्रदान नहीं करता है अथवा जांच में भारी अवरोध उत्‍पन्‍न करता है तो महानिदेशक उपलब्‍ध तथ्‍यों के आधार पर अपने जांच-परिणाम रिकार्ड कर सकते हैं और केंद्रीय सरकार से ऐसी सिफारिशें कर सकते है जिसे वह इन परिस्‍थितियों के अंतर्गत उपयुक्‍त मानते हों।

    किसी को पाटनरोधी शुल्‍क, प्रतिकारी शुल्‍क अथवा रक्षोपाय शुल्‍क के लिए कब आवेदन करना चाहिए? वापस शीर्ष पर जाएं

    पाटनरोधी शुल्‍क
    प्रतिकारी शुल्‍क
    रक्षोपाय शुल्‍क
    यदि वस्‍तु का आयात पाटित कीमतों पर किया जाता है। यदि निर्यात के देश में वस्‍तु को सब्सिडी प्राप्‍त है। यदि वस्‍तु का वर्धित मात्रा में आगमन हुआ है।
    यदि पाटित आयात घरेलू उद्योग को वास्‍तविक क्षति कारित करते हैं अथवा वास्‍तविक क्षति कारित करने की संभावना उत्‍पन्‍न करते हैं अथवा घरेलू उद्योग के अवस्‍थापन का वास्‍तविक मंदन करते है। यदि सब्सिडी प्राप्‍त आयात घरेलू उद्योग को वास्‍तविक क्षति कारित करते हैं अथवा वास्‍तविक क्षति कारित करने की संभावना उत्‍पन्‍न करते हैं अथवा घरेलू उद्योग के अवस्‍थापन का वास्‍तविक मंदन करते है। यदि वर्धित आयात समान अथवा सीधे प्रतिस्‍पर्धी उत्‍पादों के घरेलू उत्‍पादकों को गंभीर क्षति कारित करते हैं अथवा गंभीर क्षति कारित करने की संभावना उत्‍पन्‍न करते है।

    क्‍या कोई व्‍यक्‍ति पाटनरोधी शुल्‍क और रक्षोपाय शुल्‍क दोनों के लिए एक साथ आवेदन कर सकता है? वापस शीर्ष पर जाएं

    रक्षोपाय शुल्‍क नियमावली में यह अपेक्षा की जाती है कि यदि घरेलू उद्योग को क्षति पाटित आयातों द्वारा कारित की जा रही है तो घरेलू उद्योग को रक्षोपाय शुल्‍क के बजाय पाटनरोधी शुल्‍क का अधिरोपण करने की मांग करनी चाहिए।

    मामले जिनकी महानिदेशक द्वारा जांच की गई वापस शीर्ष पर जाएं

    अभी तक महानिदेशक द्वारा की गई सभी मामलों की जांच का विवरण निम्‍नलिखित है :

    वर्ष

    मामलों की संख्‍या

    1998

    6

    1999

    3

    2000

    2

    2001

    2

    2002

    3

    2003

    1

    2004

    1

    2005

    0

    2006

    0

    2007

    0

    2008

    2

    2009

    14

    2010

    2

    2011

    3

    2012

    4

    2013

    4

    2014

    7

    2015

    2

    2016

    1

    महानिदेशक की सिफारिशों पर विचार वापस शीर्ष पर जाएं

    महानिदेशक द्वारा की गई अंतिम जांच निष्कर्ष और सिफारिशों पर वाणिज्‍य सचिव की अध्‍यक्षता में गठित रक्षोपाय संबंधी स्‍थायी बोर्ड द्वारा विचार किया जाता है। इसके उपरांत रक्षोपाय स्‍थायी बोर्ड के विचारों को रक्षोपाय शुल्‍क के अनुमोदनार्थ वित्‍त मंत्री तथा मात्रात्‍मक प्रतिबंध अधिरोपित करने के लिए वाणिज्‍य मंत्री के समक्ष प्रस्‍तुत किए जाता है।